Birdev Siddappa Done Biography: कौन है कोल्हापूर जिले का IPS बीरदेव सिद्दप्पा डोने! आइए जानते है रोचक बातें

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Birdev Done Biography: IPS बीरदेव सिद्दप्पा डोने का जीवन परिचय

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Birdev Siddappa Done Biography

 

Birdev Siddappa Done Biography in Hindi

नमस्ते दोस्तो आज हम कल हमने देखा था महाराष्ट्र कि Adiba Anam Ashraf Ias Biography यह भी महाराष्ट्र के जालना कि लडकी है. लेकिन आज फिर सें हम देखणे वाले महाराष्ट्र के कोल्हापूर के एक Birdev Siddappa Done Biography कि एक छोटीसी झलक. महाराष्ट्र के कोल्हापूर जिले के कागल तहसील में यमगे गाव के बिरदेव सिद्धप्पा डोने ने संघ लोक सेवा आयोग {UPSC} सिवील सेवा परीक्षा 2024 में 551वी Rank हासील कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया.

इस सफलता के बाद वह IPS अधिकारी बनने जा रहे है. जब UPSC सिवील सर्वीसेज के फायनल रिजल्ट घोषित हुए, तब बिरदेव कर्नाटक के बेळगांव में अपने चाचा कि बकरिया चरा रहे थे. कर्नाटक CM ने फोन पर दि बधाई कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दार मौया ने खुद फोन कर उन्हे बधाई दि. भावुक होणे हुए बिरदेव ने कहा “अब मेरी अगली मंजिल IPS बनना है”. बिरदेव सिद्धप्पा डोने कि यह कहाणी सिर्फ उनकी नहीं बल्की ऊन लाखो युवाओ कि उम्मीद है जो ग्रामीण काठीनाइयों के बीच भी बडे सपने देखते है.

 

Birdev Siddappa Done Biography in Hindi

यह कहाणी बताती है कि अगर हौसले बुलंद हो, तो भेड चराने वाला भी भारत का अफसर बन सकता है. बिरदेव सिद्धप्पा IPS बने या IAS महाराष्ट्र के कोल्हापूर में UPSC क्रॅक करणे वाले चरवाहे के बेटे बिरदेव के बारे में कहा जा रहा है कि वह IPS बन गया.

 

मगर बता दे कि अभि UPSC ने सिर्फ रिजल्ट घोषित किया है. सर्विस कैडर अलोट नहीं किया है. बिरदेव कि Rank 551व उसकी सर्विस प्राथमिकता के आधार पर सर्विस कैडर अलोट होगा, जिसका पता बाद में चलेगा कि वे IAS बने है या IPS.

 

छोटी सी झोपड़ी में रहकर जीता किला: Ips Birdev Won The Fort By Living In A Small Hut

Birdev Siddappa Done ने भले ही UPSC Exam जैसा बडा किला जीत लिया है, लेकिन यह कारनामा उन्होने एक छोटी सी झोपडी में रहकर किया है. इस छोटी सी झोपडी में ही उनका पुरा परिवार रहता है, जिसके आसपास उन्होने भेडो को बांधणे के लिए बाडे बना रखे है.

 

IPS बिरदेव ने बकरियां चराने के दौरान की पढ़ाई: IPS Birdev studied while grazing goats

बिरदेव ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत और भेड बकरी के आशीर्वाद को दिया. उन्होने कहा कि बकरिया चराने के दौरान जो समय मिलता था, उसमे पढाई कि. उनकी एक तस्वीर, जिसमे वह बकरि के त्साह अभिनंदन कर रहे है.

 

IPS बिरदेव को परिवार और रिश्तेदारों का मिला साथ: IPS Birdev got support from his family and relatives

बिरदेव के पिता सिद्धप्पा ने कहा ” लडके ने बहुत मेहनत कि” बिरदेव ने भी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षको, चाचा और रिश्तेदारो को दिया. उन्होने कहा, * इनके समर्थन के बिना यह मुमकिन नहीं था*. इस दौरान इनके भाऊ, जो भारतीय सेना में नायक है उन्होने भी उनकी मदद कि.

 

बिना किसी गायडेन्स के अपने दम पर कि तैयारी बिरदेव को कभी किसी बडे अधिकारी ने UPSC को लेकरं गाईड नहीं किया. ना ही उनकी आर्थिक स्थिती ने उन्हे किसी बडे शहर में जाकार कोचिंग करणे कि इजाजत दि. उन्होने अपनी झोपडी में ही अपने दम पर तैयारी कि. किताबे भी बहुत ज्यादा नहीं थी, लेकिन दो बार असफलता के बावजुद मन में निगेटिव सोच को नहीं आणे देणे के चलते आखिरकार उन्होने वह कारनामा कर दिया, जो उनके गाव तो छोडीये पुरे कोल्हापूर में किसी ने नहीं सोचा था.

 

निष्कर्ष:

बकरिया चराने के दौरान पढाई एक ऐसी सफलता कि कहाणी है जो हमे सिखाती है कि कडी मेहनत और लगन सें कोई भी लक्ष भेदा जा सकता है. यादी अप एक Student है जो बकरिया चराते है, तो आप निश्चित रूप सें पढाई में सफल हो सकते है.

 

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